पटना/नई दिल्ली: बिहार की राजनीति में एक बड़े युग का अंत और नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। राज्य में सत्ता हस्तांतरण (Power Transfer) की सुगबुगाहट अब ठोस फैसलों में बदलती दिख रही है। कयासों के बीच भाजपा ने भी राज्य में कमान संभालने के लिए अपनी बिसात बिछा दी है।
शिवराज सिंह चौहान को मिली अहम जिम्मेदारी
भाजपा आलाकमान ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कद्दावर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को बिहार के लिए 'केंद्रीय पर्यवेक्षक' (Central Observer) नियुक्त किया है।
- मिशन: शिवराज सिंह चौहान पटना पहुँचकर भाजपा विधायक दल की बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
- अधिकार: उनकी देखरेख में ही नए नेता का चुनाव होगा और भाजपा के नेतृत्व वाले नए चेहरे पर मुहर लगेगी।
इस्तीफे से शपथ ग्रहण तक: संभावित कार्यक्रम
सियासी गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, अगले 48 घंटे बिहार के लिए निर्णायक हैं:
- 14 अप्रैल: वर्तमान कैबिनेट की अंतिम बैठक होने की संभावना है, जिसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपना त्यागपत्र राज्यपाल को सौंप सकते हैं।
- 15 अप्रैल: पटना के लोकभवन में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह की भव्य तैयारियां शुरू होने के संकेत हैं।
नीतीश कुमार का '7 सर्कुलर रोड' प्रस्थान
मुख्यमंत्री आवास (1 अणे मार्ग) में मची हलचल इस बदलाव की सबसे बड़ी गवाह है। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार का निजी सामान उनके पुराने ठिकाने 7 सर्कुलर रोड वाले बंगले में शिफ्ट किया जा रहा है। 2014 में भी पद छोड़ने के बाद नीतीश इसी आवास में रहने गए थे, जो उनके पद त्यागने का एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
सस्पेंस: कौन बनेगा अगला मुख्यमंत्री?
भले ही सरकार का बदलना तय हो, लेकिन 'अगला सीएम कौन?' इस सवाल पर भाजपा ने अभी तक रहस्य बना रखा है।
- मंत्री विजय कुमार चौधरी के बयानों ने साफ कर दिया है कि इस बार नेतृत्व का फैसला पूरी तरह भाजपा के पाले में है।
- एनडीए विधायक दल की बैठक में भाजपा द्वारा सुझाए गए नाम को ही अंतिम स्वीकृति दी जाएगी।
पटना से लेकर दिल्ली तक बढ़ती सरगर्मी और दिल्ली से भारी-भरकम पर्यवेक्षक का बिहार भेजा जाना यह पुख्ता करता है कि सूबे की सियासत अब एक नए मोड़ पर खड़ी है।
