भोपाल: पिछले चुनावों में मिली हार के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस अब पूरी तरह 'एक्शन मोड' में नजर आ रही है। संगठन को पंचायत स्तर तक धार देने के लिए नियुक्त किए गए जिला अध्यक्षों के एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर अब उनके कामकाज का कड़ा मूल्यांकन किया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष जीतु पटवारी के नेतृत्व में होने वाली इस समीक्षा में जिन पदाधिकारियों का रिपोर्ट कार्ड खराब मिलेगा, उनकी कुर्सी जाना तय माना जा रहा है।
15 से 18 अप्रैल: बैठकों का दौर और 'रवींद्र भवन' में जुटान
कांग्रेस ने अपने संगठनात्मक ढांचे को कसने के लिए एक विस्तृत शेड्यूल तैयार किया है:
- समीक्षा बैठकें: 15 से 18 अप्रैल तक चलने वाली इन बैठकों में केंद्रीय पर्यवेक्षकों की देखरेख में जिला इकाइयों के कार्यों की पड़ताल होगी।
- ब्लॉक अध्यक्षों का महासम्मेलन: 17 अप्रैल को भोपाल के रवींद्र भवन में राज्य के सभी ब्लॉक अध्यक्षों का पहला बड़ा सम्मेलन बुलाया गया है।
- प्रमुख उपस्थिति: इस सम्मेलन में सांसद, विधायक, जिला प्रभारी और संगठन महासचिवों को भी आमंत्रित किया गया है, ताकि भविष्य की रणनीति पर सामूहिक मंथन हो सके।
किन पैमानों पर होगा जिला अध्यक्षों का मूल्यांकन?
कांग्रेस ने पहली बार जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए एक 'फ्रीहैंड' सिस्टम अपनाया था। अब उनके मूल्यांकन के लिए कुछ कड़े आधार तय किए गए हैं:
- क्षेत्रीय सक्रियता: पिछले एक साल में क्षेत्र में पार्टी की कितनी मौजूदगी रही।
- संगठन विस्तार: पंचायत स्तर तक कमेटियों का गठन और संगठन को बूथ लेवल तक ले जाने में सफलता।
- मतदाता सूची पुनरीक्षण: वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य में जिला इकाई की भागीदारी कितनी प्रभावी रही।
- कार्यक्रमों में सहभागिता: प्रदेश कांग्रेस के अभियानों और स्थानीय विरोध प्रदर्शनों में कार्यकर्ताओं को जोड़ने की क्षमता।
कौन करेगा 'रिपोर्ट कार्ड' की जाँच?
समीक्षा प्रक्रिया की कमान हरीश चौधरी और वामसी रेड्डी जैसे वरिष्ठ नेताओं के हाथों में होगी। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष जीतु पटवारी और संगठन महामंत्री संजय कामले भी मौजूद रहेंगे।
भविष्य की रणनीति पर मंथन
ब्लॉक अध्यक्षों के सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य आगामी स्थानीय चुनावों के लिए जमीन तैयार करना है। बैठक में संगठन की उम्मीदों, चुनाव प्रबंधन और भाजपा की रणनीति को टक्कर देने के लिए 'माइक्रो-मैनेजमेंट' पर विशेष चर्चा की जाएगी।
एमपी कांग्रेस में यह 'सफाई अभियान' संकेत है कि अब केवल पद पर रहना काफी नहीं होगा, बल्कि जमीन पर परिणाम दिखाने वाले चेहरों को ही आगे बढ़ाया जाएगा।
