धार्मिक महत्व: वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया यानी अक्षय तृतीया को भगवान विष्णु के छठे अवतार, भगवान परशुराम की जयंती मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजन और विशिष्ट मंत्रों का जाप करने से जातक को निर्भयता, ज्ञान और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
भगवान परशुराम के सिद्ध एवं चमत्कारी मंत्र
पूजा के दौरान इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक उच्चारण अत्यंत मंगलकारी माना जाता है:
1. ध्यान मंत्र (आह्वान हेतु)
पूजन के प्रारंभ में इस मंत्र से भगवान का ध्यान करें:
'ॐ नमः परशुहस्ताय नमः कोदण्डधारिणे। नमस्ते रुद्ररूपाय विष्णवे वेदमूर्तये।'
लाभ: इस मंत्र के निरंतर जाप से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है और मार्ग में आने वाली समस्त विघ्न-बाधाएं स्वतः ही दूर हो जाती हैं। उत्तम फल के लिए कम से कम 108 बार जाप करने का विधान है।
2. परशुराम गायत्री मंत्र (मानसिक शक्ति हेतु)
'ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि। तन्नो परशुराम: प्रचोदयात्।'
लाभ: यह मंत्र साधक की बौद्धिक क्षमता बढ़ाता है और मनोकामनाओं की पूर्ति में सहायक है।
3. अर्घ्य समर्पण मंत्र
पूजा के समय जब आप भगवान परशुराम को जल अर्पित (अर्घ्य) करें, तब इस मंत्र का जाप करें:
'जमदग्निसुतो वीर क्षत्रियान्तकर प्रभो। गृहणार्घ्यं मया दत्तं कृपया परमेश्वर।'
लाभ: विधिपूर्वक अर्घ्य देने से भगवान परशुराम अत्यंत प्रसन्न होते हैं और अपने भक्त पर असीम कृपा बरसाते हैं।
4. परशुराम बीज मंत्र (विजय और आरोग्य हेतु)
भय और रोगों से मुक्ति पाने के लिए इस बीज मंत्र का निरंतर मानसिक जाप करना चाहिए:
'ॐ रां रां ॐ रां रां परशुहस्ताय नम:।'
लाभ: यह मंत्र आत्मविश्वास में वृद्धि करता है, मानसिक रूप से सशक्त बनाता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति प्रदान करता है।
5. परशुराम स्तुति
'कराभ्यां परशुं चापं दधानं रेणुकात्मजं। जामदग्न्यं भजे रामं भार्गवं क्षत्रियान्तकं।'
साधना और लाभ
परशुराम जयंती के दिन इन मंत्रों का जाप न केवल आध्यात्मिक शांति देता है, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व में अनुशासन और न्यायप्रियता का भाव भी जागृत करता है। 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर किए गए इन उपायों का फल अनंत गुना बढ़ जाता है।
नोट : यहाँ प्रस्तुत जानकारी धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

