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ईरान की पहाड़ियों से अमेरिकी पायलट का जांबाज रेस्क्यू: 36 घंटे चला मौत से मुकाबला, ट्रंप ने बताया अब तक का सबसे साहसी मिशन

Monday, 6 April 2026 | April 06, 2026 IST Last Updated 2026-04-06T18:20:15Z

अक्षय भारत : 06 अप्रैल 2026
 
वाशिंगटन डीसी : ईरान की धरतीपर गिरे अमेरिकी F-15E फाइटर जेट के दोनों जांबाजोंको एक बेहद जटिलऑपरेशन के बाद सुरक्षितबचा लिया गया है।यह पूरा मिशन करीब 36घंटों तक चला। जहाँमुख्य पायलट को शुक्रवार रातही निकाल लिया गया था,वहीं उनके साथी (वेपनसिस्टम ऑफिसर) को शनिवार रातएक विशेष अभियान के जरिए सुरक्षितस्थान पर पहुँचाया गया।
 
मिशनकी बड़ी बातें:
  • सैकड़ोंकमांडो का घेरा: दूसरे अफसर को बचानेके लिए अमेरिकी स्पेशलफोर्सेस ने ईरान कीसीमा के काफी अंदरतक घुसकर ऑपरेशन किया। इस मिशन मेंसैकड़ों जांबाज कमांडो शामिल थे। 
  • जिंदगीऔर मौत की रेस: अमेरिकी अधिकारियों ने बताया किघायल अफसर तक पहलेपहुँचने के लिए अमेरिकीऔर ईरानी सेना के बीचलगभग 48 घंटे तक होड़मची रही।
  • पूरीतरह सुरक्षित: इतनी खतरनाक परिस्थितियोंके बावजूद, रेस्क्यू टीम का एकभी सदस्य हताहत नहीं हुआ।
ट्रंपने बताया 'ऐतिहासिक'
राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रंप ने रविवार सुबहइस सफल मिशन कीपुष्टि करते हुए इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे निडर रेस्क्यू ऑपरेशन करार दिया। उन्होंनेसोशल मीडिया पर जानकारी दीकि हालांकि अफसर घायल है,लेकिन वह खतरे सेबाहर है और जल्दस्वस्थ हो जाएगा।
 
ईरानीपहाड़ियों में घायल अफसर की लुका-छिपी: 36 घंटे चला मौत से मुकाबला
अमेरिकीन्यूज पोर्टल 'एक्सियोस' ने सैन्य अधिकारियोंके हवाले से इस चौंकानेवाले मिशन का खुलासाकिया है। शुक्रवार कोईरान द्वारा गिराए गए F-15E स्ट्राइक ईगल के दो क्रूमेंबर्स में से एकको तुरंत बचा लिया गयाथा, लेकिन दूसरे अफसर (वेपन सिस्टम ऑफिसर)की कहानी किसी फिल्मी थ्रिलरसे कम नहीं है।
 
अकेलाऔर घायल, फिर भी नहीं हारा: पैराशूट से नीचे उतरतेसमय अफसर गंभीर रूपसे चोटिल हो गया था।इसके बावजूद, उसने हार नहींमानी और ईरान के कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के बेहद दुर्गमऔर पथरीले पहाड़ों को अपनी पनाहगाहबनाया।
 
SERE ट्रेनिंगने बचाई जान: घायल होने केबाद भी वह अफसरएक दिन से ज्यादासमय तक ईरानी सेनाकी आँखों में धूल झोंकतारहा। इसमें उसकी SERE ट्रेनिंग (सर्वाइवल, इवेजन, रेजिस्टेंस और एस्केप) नेमुख्य भूमिका निभाई। उसने पहाड़ों कीओट में खुद कोइस तरह छिपाया किदुश्मन उस तक पहुँचनेमें नाकाम रहा।
 
एकसाथ दो विमान हुए थे क्रैश: उसी दौरान स्थितितब और गंभीर होगई जब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of
Hormuz) के पास अमेरिका काएक और घातक विमान A-10वार्थॉग दुर्घटनाग्रस्त हो गया। गनीमतरही कि इस विमानके पायलट को भी समयरहते सुरक्षित निकाल लिया गया।
 
CIA की 'मास्टर चाल': कैसे झूठी अफवाह फैलाकर ईरान की नाक के नीचे से निकाला पायलट
ईरानऔर अमेरिका के बीच चलेइस हाई-वोल्टेज ड्रामेमें सबसे बड़ा मोड़तब आया जब CIA (अमेरिकी खुफियाएजेंसी) ने एक सोची-समझी रणनीति केतहत ईरान की IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरीगार्ड कॉर्प्स) को गुमराह करदिया।
 
भटकाने वाली रणनीति (The Diversion)
जबईरानी सेना उस लापताएयरमैन को पकड़ने केलिए पहाड़ों की खाक छानरही थी, तब CIA नेएक "फर्जी सूचना" का जाल बुना।उन्होंने ईरान के भीतरयह अफवाह फैला दी किअमेरिकी रेस्क्यू टीम पायलट तकपहुँच चुकी है औरउसे निकालने का काम शुरूहो गया है। इसगलत खबर ने ईरानीसर्च टीम का ध्यानभटका दिया और वेदूसरी दिशा में चलेगए।
 
तकनीकी सटीकता और खोज
ईरान को उलझाए रखने के दौरान, CIA ने अपनी हाई-टेक निगरानी तकनीकों के जरिए घायलएयरमैन की एकदम सटीकलोकेशन ट्रैक कर ली। यहलोकेशन तुरंत पेंटागन और व्हाइट हाउसके साथ साझा कीगई।
 
व्हाइट हाउस का एक्शन
जैसेही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पायलट कीसही स्थिति का पता चला,उन्होंने बिना देर किएसैन्य कार्रवाई यानी 'रेस्क्यू ऑपरेशन' को हरी झंडीदे दी। इस तरह,एक तरफ ईरान अफवाहोंके जाल में फंसारहा और दूसरी तरफअमेरिकी स्पेशल फोर्स ने अपने जवानको सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
 
मौतके मुहाने से वापसी: सिर्फ एक पिस्तौल और अटूट हौसला
जबअमेरिकी स्पेशल कमांडो की टीम ईरानके दुर्गम पहाड़ों में उतरी, तोउनके सामने चुनौती सिर्फ वक्त नहीं, बल्किदुश्मन की भारी घेराबंदीभी थी।
 
एक पिस्तौल और आखिरी मोर्चा
ईरानके सुनसान और पथरीले इलाकेमें फंसा वह एयरमैनपूरी तरह से निहत्थानहीं था, लेकिन उसकेपास आत्मरक्षा के लिए सिर्फएक सर्विस पिस्तौल थी। जब रेस्क्यूटीम उसके करीब पहुँची,तो वहां भीषण गोलीबारी
(Crossfire) हुई। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ऊपर सेमोर्चा संभाला और ईरानी सेनाको पीछे धकेलने केलिए हवाई हमले किए,जिससे रेस्क्यू टीम को सुरक्षितरास्ता मिल सका।
 
इनाम और खतरा: मेजर जनरल का विश्लेषण
रिटायर्डमेजर जनरल मार्क मैक्कार्लीके अनुसार, यह मिशन "असंभव"के करीब था। उन्होंनेसीएनएन (CNN) को बताया कि:
  • सुनसानइलाका: वह क्षेत्र पूरीतरह वीरान और पहाड़ी था,जहाँ छिपना जितना आसान था, पकड़ेजाने पर बचना उतनाही मुश्किल।
  • इनामकी घोषणा: ईरानी प्रशासन ने उस अमेरिकीसैनिक को पकड़ने वालेके लिए इनाम का ऐलान कर दिया था,जिससे खतरा और बढ़गया था।
 
तकनीक बनी मददगार (Emergency Beacon)
मैक्कार्लीने बताया कि इस रेस्क्यूकी सफलता के पीछे 'इमरजेंसी बीकन' का बड़ा हाथरहा होगा। फाइटर जेट के क्रैशहोते ही यह डिवाइससक्रिय हो जाती हैऔर कमांड सेंटर को लगातार सिग्नलभेजती रहती है। इसीबीकन की मदद सेकमांडो सटीक लोकेशन तकपहुँच पाए और अंततःपूरा दस्ता सुरक्षित ईरान की सीमासे बाहर आ गया।
 
इतिहासमें पहली बार: ईरान ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट, ड्रोन और कमांडो ने मिलकर रचा इतिहास
इसयुद्ध के इतिहास मेंपहली बार एक ऐसीघटना घटी जिसने सबकोचौंका दिया। F-15E स्ट्राइक ईगल, जिसे अमेरिकी वायुसेनाकी ताकत माना जाताहै, उसे ईरानी सेनाने मार गिराया। एकमहीने से जारी इससंघर्ष में यह पहलाअवसर था जब अमेरिकाको हवा में इतनीबड़ी चुनौती मिली।
 
ड्रोन की अचूक सुरक्षा (The Reaper's Shield)
'दवॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट केअनुसार, जब एयरमैन ईरानकी दुर्गम पहाड़ियों में छिपा हुआथा, तब वह अकेलानहीं था। ऊपर से MQ-9रीपर ड्रोन उस पर नजररखे हुए थे। जबईरानी सैनिक उस अफसर केकरीब पहुँचने की कोशिश कररहे थे, तब इनड्रोन्स ने सटीक फायरिंगकरके दुश्मन को पीछे खदेड़दिया।
 
एक साहसी और जोखिम भरा फैसला
रिपोर्टमें यह भी बतायागया कि उस जांबाजएयरमैन ने अपनी टीमतक पहुँचने के लिए एकऐसा अत्यंत जोखिम भरा कदम उठाया, जिसने उसकी जान बचाई।हालांकि, सुरक्षा कारणों से उस कदमकी पूरी जानकारी साझानहीं की गई है,लेकिन यह स्पष्ट हैकि उसकी सूझबूझ नेमिशन को सफल बनाया।
 
दर्जनों विमानों का सुरक्षा कवच
यहकोई छोटा-मोटा ऑपरेशननहीं था। जब अमेरिकीकमांडो टीम ईरान कीसीमा के भीतर घुसी,तो उनके ऊपर दर्जनोंअमेरिकी लड़ाकू विमानों का सुरक्षा घेराथा। इस भारी हवाईसुरक्षा की वजह सेजमीन पर ईरानी फोर्सअमेरिका का ज्यादा विरोधनहीं कर पाई औरकमांडो टीम बिजली कीरफ्तार से एयरमैन कोलेकर सुरक्षित बाहर निकल आई।
 
पीछेनहीं छोड़े सुराग: भागने से पहले अमेरिका ने खुद नष्ट किए अपने दो विमान
रेस्क्यूमिशन के आखिरी पलोंमें एक बड़ा नाटकदेखने को मिला। 'दन्यूयॉर्क टाइम्स' के खुलासे केमुताबिक, यह ऑपरेशन जितनासफल था, उतना हीचुनौतीपूर्ण भी।
 
अस्थायी एयरस्ट्रिप पर फंसा विमान
अमेरिकीस्पेशल फोर्स ने ईरान केएक सुनसान और सुदूर इलाकेमें गुपचुप तरीके से एक अस्थायी हवाई पट्टी (Airstrip) तैयार की थी। मिशनके दौरान, एयरमैन और कमांडो कोनिकालने पहुंचे दो अमेरिकी ट्रांसपोर्टविमान तकनीकी कारणों से वहां फंसगए। स्थिति को संभालने केलिए अमेरिका को तुरंत तीननए बैकअप विमान भेजने पड़े।
 
'सर्च एंड डिस्ट्रॉय' नीति
अमेरिकानहीं चाहता था कि उसकीउन्नत तकनीक या विमान ईरानके कब्जे में आएं। इसलिए,सैनिकों और घायल एयरमैनको सुरक्षित निकालने के बाद, अमेरिकीसेना ने अपने ही दोनों फंसे हुए विमानों को बम से उड़ा दिया। ईरान के अंदरसे आई तस्वीरों मेंइन जले हुए विमानोंके अवशेष देखे गए हैं,जो इस बात कीपुष्टि करते हैं किअमेरिका ने पीछे कोईभी सैन्य सबूत नहीं छोड़ा।
 
कुवैत में इलाज और मिशन का समापन
इसविशाल ऑपरेशन में सैकड़ों विशिष्टकमांडो ने अपनी जानजोखिम में डाली। सफलतापूर्वकरेस्क्यू किए जाने केबाद, घायल वेपन्स ऑफिसरको तुरंत कुवैत ले जाया गया,जहाँ उनका मेडिकल उपचारचल रहा है।
 
ट्रंपका बड़ा बयान: 'दुश्मन के घर में घुसकर दोहरे मिशन को दिया अंजाम'
अमेरिकीराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरेरेस्क्यू ऑपरेशन की सफलता परदेश को संबोधित करतेहुए इसे सैन्य इतिहासका एक अविस्मरणीय अध्याय बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यहकेवल एक सैनिक कीजान बचाना नहीं, बल्कि अमेरिकी शक्ति का प्रदर्शन था।
 
दुनिया के सबसे घातक हथियारों का पहरा
ट्रंपने जानकारी दी कि घायलएयरमैन को सुरक्षित निकालनेके लिए अमेरिकी वायुसेनाने दर्जनों ऐसे विमानों कोतैनात किया था, जो दुनिया के सबसे विध्वंसक हथियारों से लैस थे।हालांकि उन्होंने विमान गिरने की तकनीकी वजहोंपर चुप्पी साधे रखी, लेकिनयह जरूर कहा किघायल सैनिक अब खतरे सेबाहर है और जल्दस्वस्थ हो जाएगा।
 
एक साथ दो 'सीक्रेट' मिशन
राष्ट्रपतिने एक बड़ा खुलासाकरते हुए बताया कियह ऑपरेशन अकेले नहीं था। दरअसल,इससे एक दिन पहलेभी एक और पायलटको सफलतापूर्वक निकाला गया था।
रणनीतिकचुप्पी: पहले रेस्क्यू कीखबर को इसलिए गुप्तरखा गया था ताकिदूसरे चल रहे मिशनकी गोपनीयता और सुरक्षा बनीरहे और दुश्मन कोभनक न लगे।
 
इतिहास में पहली बार: 'डबल रेस्क्यू'
ट्रंपके अनुसार, सैन्य इतिहास में यह पहलीबार हुआ है जबदुश्मन की सीमा केइतने अंदर जाकर, दोअलग-अलग ऑपरेशनों मेंदो पायलटों को सुरक्षित निकालागया हो। उन्होंने इसेअमेरिकी सेना के साहसका सर्वोच्च उदाहरण बताया।
 
ईरान के आसमान पर 'अमेरिकी राज'
उन्होंनेगर्व के साथ कहाकि इन ऑपरेशनों कीसफलता यह साबित करतीहै कि ईरान केहवाई क्षेत्र (Airspace) पर आज भीअमेरिका का पूर्ण नियंत्रण और दबदबा है। ट्रंप नेइस जीत को पूरेराष्ट्र के लिए गौरवका क्षण बताते हुएसभी देशवासियों से एकजुट होनेकी अपील की।

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