मिशन की बड़ी बातें:
सैकड़ों कमांडो का घेरा: दूसरे अफसर को बचाने के लिए अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने ईरान की सीमा के काफी अंदर तक घुसकर ऑपरेशन किया। इस मिशन में सैकड़ों जांबाज कमांडो शामिल थे।
जिंदगी और मौत की रेस: अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि घायल अफसर तक पहले पहुँचने के लिए अमेरिकी और ईरानी सेना के बीच लगभग 48 घंटे तक होड़ मची रही।
पूरी तरह सुरक्षित: इतनी खतरनाक परिस्थितियों के बावजूद, रेस्क्यू टीम का एक भी सदस्य हताहत नहीं हुआ।
ट्रंप ने बताया 'ऐतिहासिक'
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार सुबह इस सफल मिशन की पुष्टि करते हुए इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे निडर रेस्क्यू ऑपरेशन करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि हालांकि अफसर घायल है, लेकिन वह खतरे से बाहर है और जल्द स्वस्थ हो जाएगा।
ईरानी पहाड़ियों में घायल अफसर की लुका-छिपी: 36 घंटे चला मौत से मुकाबला
अमेरिकी न्यूज पोर्टल 'एक्सियोस' ने सैन्य अधिकारियों के हवाले से इस चौंकाने वाले मिशन का खुलासा किया है। शुक्रवार को ईरान द्वारा गिराए गए F-15E स्ट्राइक ईगल के दो क्रू मेंबर्स में से एक को तुरंत बचा लिया गया था, लेकिन दूसरे अफसर (वेपन सिस्टम ऑफिसर) की कहानी किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है।
अकेला और घायल, फिर भी नहीं हारा: पैराशूट से नीचे उतरते समय अफसर गंभीर रूप से चोटिल हो गया था। इसके बावजूद, उसने हार नहीं मानी और ईरान के कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के बेहद दुर्गम और पथरीले पहाड़ों को अपनी पनाहगाह बनाया।
SERE ट्रेनिंग ने बचाई जान: घायल होने के बाद भी वह अफसर एक दिन से ज्यादा समय तक ईरानी सेना की आँखों में धूल झोंकता रहा। इसमें उसकी SERE ट्रेनिंग (सर्वाइवल, इवेजन, रेजिस्टेंस और एस्केप) ने मुख्य भूमिका निभाई। उसने पहाड़ों की ओट में खुद को इस तरह छिपाया कि दुश्मन उस तक पहुँचने में नाकाम रहा।
एक साथ दो विमान हुए थे क्रैश: उसी दौरान स्थिति तब और गंभीर हो गई जब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास अमेरिका का एक और घातक विमान A-10 वार्थॉग दुर्घटनाग्रस्त हो गया। गनीमत रही कि इस विमान के पायलट को भी समय रहते सुरक्षित निकाल लिया गया।
CIA की 'मास्टर चाल': कैसे झूठी अफवाह फैलाकर ईरान की नाक के नीचे से निकाला पायलट
ईरान और अमेरिका के बीच चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब CIA (अमेरिकी खुफिया एजेंसी) ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत ईरान की IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) को गुमराह कर दिया।
भटकाने वाली रणनीति (The Diversion)
जब ईरानी सेना उस लापता एयरमैन को पकड़ने के लिए पहाड़ों की खाक छान रही थी, तब CIA ने एक "फर्जी सूचना" का जाल बुना। उन्होंने ईरान के भीतर यह अफवाह फैला दी कि अमेरिकी रेस्क्यू टीम पायलट तक पहुँच चुकी है और उसे निकालने का काम शुरू हो गया है। इस गलत खबर ने ईरानी सर्च टीम का ध्यान भटका दिया और वे दूसरी दिशा में चले गए।
तकनीकी सटीकता और खोज
ईरान को उलझाए रखने के दौरान, CIA ने अपनी हाई-टेक निगरानी तकनीकों के जरिए घायल एयरमैन की एकदम सटीक लोकेशन ट्रैक कर ली। यह लोकेशन तुरंत पेंटागन और व्हाइट हाउस के साथ साझा की गई।
व्हाइट हाउस का एक्शन
जैसे ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पायलट की सही स्थिति का पता चला, उन्होंने बिना देर किए सैन्य कार्रवाई यानी 'रेस्क्यू ऑपरेशन' को हरी झंडी दे दी। इस तरह, एक तरफ ईरान अफवाहों के जाल में फंसा रहा और दूसरी तरफ अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने अपने जवान को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
मौत के मुहाने से वापसी: सिर्फ एक पिस्तौल और अटूट हौसला
जब अमेरिकी स्पेशल कमांडो की टीम ईरान के दुर्गम पहाड़ों में उतरी, तो उनके सामने चुनौती सिर्फ वक्त नहीं, बल्कि दुश्मन की भारी घेराबंदी भी थी।
एक पिस्तौल और आखिरी मोर्चा
ईरान के सुनसान और पथरीले इलाके में फंसा वह एयरमैन पूरी तरह से निहत्था नहीं था, लेकिन उसके पास आत्मरक्षा के लिए सिर्फ एक सर्विस पिस्तौल थी। जब रेस्क्यू टीम उसके करीब पहुँची, तो वहां भीषण गोलीबारी (Crossfire) हुई। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ऊपर से मोर्चा संभाला और ईरानी सेना को पीछे धकेलने के लिए हवाई हमले किए, जिससे रेस्क्यू टीम को सुरक्षित रास्ता मिल सका।
इनाम और खतरा: मेजर जनरल का विश्लेषण
रिटायर्ड मेजर जनरल मार्क मैक्कार्ली के अनुसार, यह मिशन "असंभव" के करीब था। उन्होंने सीएनएन (CNN) को बताया कि:
सुनसान इलाका: वह क्षेत्र पूरी तरह वीरान और पहाड़ी था, जहाँ छिपना जितना आसान था, पकड़े जाने पर बचना उतना ही मुश्किल।
इनाम की घोषणा: ईरानी प्रशासन ने उस अमेरिकी सैनिक को पकड़ने वाले के लिए इनाम का ऐलान कर दिया था, जिससे खतरा और बढ़ गया था।
तकनीक बनी मददगार (Emergency Beacon)
मैक्कार्ली ने बताया कि इस रेस्क्यू की सफलता के पीछे 'इमरजेंसी बीकन' का बड़ा हाथ रहा होगा। फाइटर जेट के क्रैश होते ही यह डिवाइस सक्रिय हो जाती है और कमांड सेंटर को लगातार सिग्नल भेजती रहती है। इसी बीकन की मदद से कमांडो सटीक लोकेशन तक पहुँच पाए और अंततः पूरा दस्ता सुरक्षित ईरान की सीमा से बाहर आ गया।
इतिहास में पहली बार: ईरान ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट, ड्रोन और कमांडो ने मिलकर रचा इतिहास
इस युद्ध के इतिहास में पहली बार एक ऐसी घटना घटी जिसने सबको चौंका दिया। F-15E स्ट्राइक ईगल, जिसे अमेरिकी वायुसेना की ताकत माना जाता है, उसे ईरानी सेना ने मार गिराया। एक महीने से जारी इस संघर्ष में यह पहला अवसर था जब अमेरिका को हवा में इतनी बड़ी चुनौती मिली।
ड्रोन की अचूक सुरक्षा (The Reaper's Shield)
'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के अनुसार, जब एयरमैन ईरान की दुर्गम पहाड़ियों में छिपा हुआ था, तब वह अकेला नहीं था। ऊपर से MQ-9 रीपर ड्रोन उस पर नजर रखे हुए थे। जब ईरानी सैनिक उस अफसर के करीब पहुँचने की कोशिश कर रहे थे, तब इन ड्रोन्स ने सटीक फायरिंग करके दुश्मन को पीछे खदेड़ दिया।
एक साहसी और जोखिम भरा फैसला
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उस जांबाज एयरमैन ने अपनी टीम तक पहुँचने के लिए एक ऐसा अत्यंत जोखिम भरा कदम उठाया, जिसने उसकी जान बचाई। हालांकि, सुरक्षा कारणों से उस कदम की पूरी जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन यह स्पष्ट है कि उसकी सूझबूझ ने मिशन को सफल बनाया।
दर्जनों विमानों का सुरक्षा कवच
यह कोई छोटा-मोटा ऑपरेशन नहीं था। जब अमेरिकी कमांडो टीम ईरान की सीमा के भीतर घुसी, तो उनके ऊपर दर्जनों अमेरिकी लड़ाकू विमानों का सुरक्षा घेरा था। इस भारी हवाई सुरक्षा की वजह से जमीन पर ईरानी फोर्स अमेरिका का ज्यादा विरोध नहीं कर पाई और कमांडो टीम बिजली की रफ्तार से एयरमैन को लेकर सुरक्षित बाहर निकल आई।
पीछे नहीं छोड़े सुराग: भागने से पहले अमेरिका ने खुद नष्ट किए अपने दो विमान
रेस्क्यू मिशन के आखिरी पलों में एक बड़ा नाटक देखने को मिला। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' के खुलासे के मुताबिक, यह ऑपरेशन जितना सफल था, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी।
अस्थायी एयरस्ट्रिप पर फंसा विमान
अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने ईरान के एक सुनसान और सुदूर इलाके में गुपचुप तरीके से एक अस्थायी हवाई पट्टी (Airstrip) तैयार की थी। मिशन के दौरान, एयरमैन और कमांडो को निकालने पहुंचे दो अमेरिकी ट्रांसपोर्ट विमान तकनीकी कारणों से वहां फंस गए। स्थिति को संभालने के लिए अमेरिका को तुरंत तीन नए बैकअप विमान भेजने पड़े।
'सर्च एंड डिस्ट्रॉय' नीति
अमेरिका नहीं चाहता था कि उसकी उन्नत तकनीक या विमान ईरान के कब्जे में आएं। इसलिए, सैनिकों और घायल एयरमैन को सुरक्षित निकालने के बाद, अमेरिकी सेना ने अपने ही दोनों फंसे हुए विमानों को बम से उड़ा दिया। ईरान के अंदर से आई तस्वीरों में इन जले हुए विमानों के अवशेष देखे गए हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि अमेरिका ने पीछे कोई भी सैन्य सबूत नहीं छोड़ा।
कुवैत में इलाज और मिशन का समापन
इस विशाल ऑपरेशन में सैकड़ों विशिष्ट कमांडो ने अपनी जान जोखिम में डाली। सफलतापूर्वक रेस्क्यू किए जाने के बाद, घायल वेपन्स ऑफिसर को तुरंत कुवैत ले जाया गया, जहाँ उनका मेडिकल उपचार चल रहा है।
ट्रंप का बड़ा बयान: 'दुश्मन के घर में घुसकर दोहरे मिशन को दिया अंजाम'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की सफलता पर देश को संबोधित करते हुए इसे सैन्य इतिहास का एक अविस्मरणीय अध्याय बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक सैनिक की जान बचाना नहीं, बल्कि अमेरिकी शक्ति का प्रदर्शन था।
दुनिया के सबसे घातक हथियारों का पहरा
ट्रंप ने जानकारी दी कि घायल एयरमैन को सुरक्षित निकालने के लिए अमेरिकी वायुसेना ने दर्जनों ऐसे विमानों को तैनात किया था, जो दुनिया के सबसे विध्वंसक हथियारों से लैस थे। हालांकि उन्होंने विमान गिरने की तकनीकी वजहों पर चुप्पी साधे रखी, लेकिन यह जरूर कहा कि घायल सैनिक अब खतरे से बाहर है और जल्द स्वस्थ हो जाएगा।
एक साथ दो 'सीक्रेट' मिशन
राष्ट्रपति ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि यह ऑपरेशन अकेले नहीं था। दरअसल, इससे एक दिन पहले भी एक और पायलट को सफलतापूर्वक निकाला गया था।
रणनीतिक चुप्पी: पहले रेस्क्यू की खबर को इसलिए गुप्त रखा गया था ताकि दूसरे चल रहे मिशन की गोपनीयता और सुरक्षा बनी रहे और दुश्मन को भनक न लगे।
इतिहास में पहली बार: 'डबल रेस्क्यू'
ट्रंप के अनुसार, सैन्य इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब दुश्मन की सीमा के इतने अंदर जाकर, दो अलग-अलग ऑपरेशनों में दो पायलटों को सुरक्षित निकाला गया हो। उन्होंने इसे अमेरिकी सेना के साहस का सर्वोच्च उदाहरण बताया।
ईरान के आसमान पर 'अमेरिकी राज'
उन्होंने गर्व के साथ कहा कि इन ऑपरेशनों की सफलता यह साबित करती है कि ईरान के हवाई क्षेत्र (Airspace) पर आज भी अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण और दबदबा है। ट्रंप ने इस जीत को पूरे राष्ट्र के लिए गौरव का क्षण बताते हुए सभी देशवासियों से एकजुट होने की अपील की।

