नई दिल्ली: भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐसी ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की है, जिसकी गूँज अब पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) के सफल संचालन के साथ ही भारत ने अपने त्रि-स्तरीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण में मजबूती से कदम रख दिया है।
वैश्विक मंच पर बढ़ी भारत की साख
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रासी ने भारत की इस तकनीकी विशेषज्ञता की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि ऊर्जा स्थिरता और परमाणु भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगी। पेरिस स्थित अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भी भारत के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के दशकों के परिश्रम को सलाम किया है।
रूस के बाद भारत ही 'किंग'
इस तकनीक की जटिलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रूस के अलावा दुनिया का कोई भी अन्य देश अब तक इसे सफलतापूर्वक संचालित नहीं कर पाया है।
- बड़ी चुनौती: अमेरिका और जापान जैसे विकसित देशों ने भी दशकों पहले इस जटिल तकनीक पर काम करना बंद कर दिया था।
- नया कीर्तिमान: भारत अब दुनिया का दूसरा ऐसा देश बन गया है, जिसके पास व्यावसायिक स्तर पर 'फास्ट ब्रीडर रिएक्टर' चलाने की क्षमता है।
तकनीक जो कचरे से बनाएगी बिजली
कलपक्कम का यह रिएक्टर न केवल बिजली पैदा करेगा, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है:
- ईंधन: इसमें प्लूटोनियम आधारित 'मिक्स्ड ऑक्साइड' का प्रयोग किया गया है।
- कूलिंग सिस्टम: रिएक्टर को नियंत्रित रखने के लिए इसमें लिक्विड सोडियम (तरल सोडियम) का इस्तेमाल होता है।
- कचरा प्रबंधन: यह रिएक्टर पुराने परमाणु संयत्रों से निकले कचरे को ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर सकता है, जिससे रेडियोधर्मी कचरे की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी।
भविष्य की राह: 100 गीगावाट का लक्ष्य
यह सफलता परमाणु वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा के उस सपने को सच करने के करीब है, जिसमें भारत को थोरियम आधारित ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनाना था।
- वर्तमान क्षमता: अभी भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता 8.7 गीगावाट है।
- 2031-32 का लक्ष्य: इसे बढ़ाकर 22.48 गीगावाट करने की तैयारी है।
- अंतिम लक्ष्य: भारत सरकार ने भविष्य में परमाणु स्रोतों से 100 गीगावाट बिजली उत्पादन का विशाल लक्ष्य रखा है।
क्या होगा अगला कदम?
भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम (BHAVINI) द्वारा विकसित इस रिएक्टर पर अभी कई वैज्ञानिक परीक्षण किए जाएंगे, जिसके बाद इसे नेशनल पावर ग्रिड से जोड़कर आम जनता तक बिजली पहुँचाई जाएगी।

