नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने महिला आरक्षण और सदन की मर्यादा को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने भरोसा जताया कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में होने वाले आगामी संशोधनों को सभी राजनीतिक दलों का समर्थन मिलेगा और इसे सर्वसम्मति से पारित किया जाएगा।
महिला आरक्षण: 2029 से लागू करने की तैयारी
ओम बिरला ने याद दिलाया कि सितंबर 2023 में नए संसद भवन में पारित होने वाला यह पहला ऐतिहासिक कानून था। वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजना पर उन्होंने मुख्य बातें कहीं:
- सीटों का विस्तार: प्रस्तावित संशोधन के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो सकती है, जिसमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी।
- समय सीमा में बदलाव: वर्तमान प्रावधानों के अनुसार, 33% आरक्षण जनगणना और परिसीमन के बाद 2034 तक लागू होने की संभावना है। हालांकि, सरकार की मंशा इसे 2029 के आम चुनावों से ही प्रभावी बनाने की है, जिसके लिए कानून में संशोधन आवश्यक है।
- विशेष सत्र: बजट सत्र के विस्तार के साथ ही 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद का एक विशेष तीन दिवसीय सत्र आयोजित किया जा रहा है, जिसमें इन विषयों पर चर्चा संभव है।
सदन की मर्यादा: बैनर और असंसदीय भाषा पर रोक
स्पीकर ने संसद के भीतर अनुशासन बनाए रखने पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि सदन की गरिमा से समझौता नहीं किया जाएगा।
- संसदीय भाषा का चयन: उन्होंने कहा कि सांसदों को अपनी बात रखते समय सदन की समृद्ध परंपराओं का पालन करना चाहिए और असंसदीय शब्दों के प्रयोग से बचना चाहिए।
- प्लेकार्ड और नारेबाजी: सदन के भीतर बैनर, पोस्टर या प्लेकार्ड दिखाने की अनुमति नहीं होगी। इसे लेकर पहले ही बुलेटिन जारी कर सभी दलों से अपील की जा चुकी है।
- लोकतांत्रिक मूल्य: कार्य मंत्रणा समिति (BAC) की बैठकों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सदन में नारेबाजी और व्यवधान डालना लोकतंत्र के हित में नहीं है।
लोकसभा अध्यक्ष का संदेश: "कानून बनाना और चर्चा करना संसद का मुख्य कार्य है। मुझे विश्वास है कि जिस तरह 2023 में सभी दलों ने एकजुटता दिखाई थी, वैसे ही आगामी संशोधनों पर भी सभी का सहयोग मिलेगा।"

