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रूस युद्ध में फंसे भारतीयों पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: 'या तो वे मर रहे हैं या घायल', केंद्र से मांगा एक हफ्ते में जवाब

Friday, 10 April 2026 | April 10, 2026 IST Last Updated 2026-04-10T10:44:09Z

नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने गहरी चिंता व्यक्त की है। कथित तौर पर धोखे से रूसी सेना में शामिल किए गए 26 भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर सख्त जवाब तलब किया है।

"हालात बेहद गंभीर हैं"
जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने भावुक और कड़ा तर्क देते हुए कहा, “रूस में हमारे नागरिक या तो जान गंवा रहे हैं या गंभीर रूप से घायल हैं।” वकील ने राज्य की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए इसे एक बड़ा मानवीय संकट बताया।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के मुख्य बिंदु:
  • एक हफ्ते की मोहलत: कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से एक सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब और निर्देश लेकर आने को कहा है।
  • बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका: यह याचिका उन 26 भारतीयों के परिवारों की ओर से दायर की गई है जिन्हें सुरक्षित वापस लाने की गुहार लगाई गई है।
  • जल्द कार्रवाई का संकेत: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि मामला नागरिकों के जीवन और सुरक्षा से जुड़ा है, तो किसी भी तरह की देरी स्वीकार्य नहीं होगी।

नौकरी के नाम पर 'जबरन युद्ध' में धकेलने का आरोप
याचिका में चौंकाने वाले दावे किए गए हैं:
  • धोखाधड़ी: भारतीय युवाओं को रूस में आकर्षक नौकरी दिलाने के बहाने ले जाया गया था।
  • पासपोर्ट जब्ती: वहां पहुँचने पर उनके पासपोर्ट छीन लिए गए और उन्हें जबरन यूक्रेन के खिलाफ फ्रंटलाइन पर लड़ने के लिए मजबूर किया गया।
  • मानवीय संकट: कई युवाओं को उनकी इच्छा के विरुद्ध युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया है, जहाँ उनका जीवन खतरे में है।
सरकार का पक्ष
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि सरकार इस मामले की गहनता से जांच करेगी और फंसे हुए नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। हालांकि, याचिकाकर्ता के पक्ष ने आरोप लगाया है कि अब तक प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई अपर्याप्त है।

आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से स्पष्ट रूप से पूछा है कि अब तक कितने नागरिकों को रेस्क्यू किया गया है और बाकी लोगों को लाने के लिए क्या योजना है। अब सबकी नजरें एक सप्ताह बाद सरकार द्वारा दाखिल किए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं। यदि जवाब संतोषजनक नहीं होता, तो अदालत रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर कड़े आदेश जारी कर सकती है।

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