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थार में 'काले सोने' का चमत्कार: ऑयल इंडिया के उत्पादन में 70% का उछाल, बाघेवाला फील्ड ने रचा इतिहास

Monday, 6 April 2026 | April 06, 2026 WIB Last Updated 2026-04-06T15:32:01Z

अक्षय भारत : 06 अप्रैल 2026

राजस्थान: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में जारी अशांति के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है। सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने राजस्थान के थार रेगिस्तान में कच्चे तेल के उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

उत्पादन क्षमता में जबरदस्त रिकॉर्ड
कंपनी ने जोधपुर के बलुआ पत्थर क्षेत्र (Sandstone Area) से रोजाना 1,202 बैरल तेल निकालकर सबको चौंका दिया है। गौरतलब है कि पिछले साल यह उत्पादन महज 705 बैरल प्रतिदिन था। इस तरह कंपनी ने उत्पादन की रफ्तार में करीब 70 प्रतिशत की भारी बढ़त दर्ज की है। ऐसे समय में जब दुनिया भर में तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं हैं, भारत की यह घरेलू कामयाबी बेहद अहम मानी जा रही है।

कैसे मिली यह बड़ी कामयाबी? (तकनीकी सुधार)
बाघेवाला ऑयल फील्ड में उत्पादन बढ़ाने के लिए कंपनी ने आधुनिक इंजीनियरिंग का सहारा लिया है:
  • स्टीम इंजेक्शन (CSS) तकनीक: तेल निकालने के लिए अधिक कुओं में भाप के दबाव वाली विशेष 'स्टीम इंजेक्शन' तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
  • नए कुओं की खुदाई: इस साल कंपनी ने रिकॉर्ड 13 नए कुएं खोदे हैं, जिससे कुल क्षमता में तेजी से विस्तार हुआ है।
बाघेवाला ऑयल फील्ड: एक नजर में
यह तेल क्षेत्र राजस्थान के बीकानेर-नागौर बेसिन में स्थित है, जो देश के चुनिंदा भारी तेल क्षेत्रों (Heavy Oil Fields) में से एक है।
  • खोज: 1991 में इसकी खोज हुई थी।
  • विस्तार: यह लगभग 200 वर्ग किलोमीटर के विशाल इलाके में फैला है।
  • सक्रियता: यहाँ कुल 52 कुएं मौजूद हैं, जिनमें से 33 कुओं से वर्तमान में सक्रिय रूप से उत्पादन लिया जा रहा है।
रिफाइनरी तक का सफर
यहाँ से निकलने वाला कच्चा तेल टैंकरों के माध्यम से गुजरात के मेहसाणा (ONGC) भेजा जाता है। इसके बाद इसे पाइपलाइन के जरिए इंडियन ऑयल (IOCL) की कोयली रिफाइनरी पहुँचाया जाता है।

ऊर्जा सुरक्षा की ओर बढ़ते कदम
आंकड़ों की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजस्थान क्षेत्र से कुल उत्पादन 43,773 मीट्रिक टन रहा, जो पिछले साल के 32,787 मीट्रिक टन के मुकाबले काफी ज्यादा है। उत्पादन में यह वृद्धि भारत की विदेशों से तेल आयात करने की निर्भरता को कम करने में मील का पत्थर साबित होगी।