भोपाल/इंदौर: मध्य प्रदेश एटीएस (ATS) ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और मोबाइल लोकेशन जैसे गोपनीय डेटा की अवैध तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए इंदौर क्राइम ब्रांच में तैनात एएसआई (ASI) रामपाल सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
कैसे खुला राज?
मामले का खुलासा तब हुआ जब एटीएस को जासूसी के नाम पर लोगों की निजी जानकारी के अवैध कारोबार की सूचना मिली।
- प्रमुख कड़ी: जांच में डिटेक्टिव एजेंसी संचालक मुकेश तोमर का नाम सामने आया, जिसके संपर्कों की पड़ताल करने पर एएसआई रामपाल से संदिग्ध बातचीत के सबूत मिले।
- पद का दुरुपयोग: रामपाल अपने आधिकारिक पद का इस्तेमाल कर गोपनीय डेटा निकालता था और उसे कमीशन के बदले निजी एजेंसियों को बेच देता था।
महाराष्ट्र से हुई गिरफ्तारी
एटीएस की टीम ने तकनीकी सर्विलांस की मदद से रामपाल का पीछा किया और उसे महाराष्ट्र के सोलापुर से हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान उसके मोबाइल और लैपटॉप से डेटा की बिक्री से जुड़े कई अहम दस्तावेज और डिजिटल सबूत बरामद हुए हैं।
जासूसी एजेंसियों का फैला जाल
जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क काफी समय से सक्रिय था:
- इंदौर और भोपाल कनेक्शन: रामपाल लगातार 'इंदौर डिटेक्टिव सर्विस' के योगेश बेलवाल और भोपाल की 'कर्मा डिटेक्टिव एजेंसी' के अनिकेत पटेल के संपर्क में था।
- आमने-सामने मुलाकात: टावर लोकेशन से पुष्टि हुई है कि आरोपी पुलिसकर्मी और एजेंसी संचालक कई बार गोपनीय डेटा साझा करने के लिए मिल चुके थे।
- अन्य गिरफ्तारियां: एटीएस ने योगेश बेलवाल और अनिकेत पटेल को भी हिरासत में ले लिया है।
मुख्य आरोपी अब भी फरार
गिरोह का मुख्य संदिग्ध मुकेश तोमर गिरफ्तारी की भनक लगते ही फरार हो गया है। सूत्रों के मुताबिक वह उत्तराखंड में कहीं छिपा हुआ है और उसने अपने सभी मोबाइल फोन बंद कर लिए हैं।
वर्तमान स्थिति: रिमांड पर पूछताछ
कोर्ट ने एएसआई रामपाल को एटीएस की रिमांड पर भेज दिया है। अब जांच का मुख्य बिंदु यह है कि:
- इस नेटवर्क ने अब तक कुल कितने नागरिकों की गोपनीयता के साथ खिलवाड़ किया है?
- क्या पुलिस विभाग के कुछ अन्य लोग भी इस अवैध गतिविधियों में शामिल थे?
यह मामला सुरक्षा और डेटा गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एटीएस अब जब्त किए गए लैपटॉप और मोबाइल के जरिए इस नेटवर्क की गहराई तक पहुँचने की कोशिश कर रही है।

