पोर्ट लुई (मॉरीशस): भारत और मॉरीशस के बीच दशकों पुराने रिश्तों को एक नई मानवीय ऊँचाई मिली है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मॉरीशस के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में देश की पहली अत्याधुनिक 'रीनल ट्रांसप्लांट यूनिट' (किडनी प्रत्यारोपण इकाई) का लोकार्पण किया।
चिकित्सा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा मॉरीशस
इस इकाई के उद्घाटन को एक मील का पत्थर बताते हुए डॉ. जयशंकर ने कहा कि यह केवल एक मेडिकल बिल्डिंग नहीं, बल्कि मॉरीशस के किडनी रोगियों के लिए जीवन की एक नई किरण है।
- स्थानीय स्तर पर इलाज: अब मॉरीशस के मरीजों को उन्नत किडनी इलाज के लिए विदेश नहीं जाना पड़ेगा।
- कम होगा खर्च: अपने देश में ही इलाज मिलने से मरीजों का आर्थिक बोझ और मानसिक तनाव दोनों कम होंगे।
'कूटनीति से बढ़कर पारिवारिक रिश्ता'
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष संदेश साझा किया। उन्होंने कहा:
"भारत और मॉरीशस का संबंध केवल फाइलों या कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 'दिल का रिश्ता' है। हमारे लिए मॉरीशस केवल एक रणनीतिक साझेदार नहीं, बल्कि हमारे परिवार का अभिन्न अंग है।"
भविष्य की स्वास्थ्य योजनाएं: साझेदारी का अगला चरण
भारत और मॉरीशस के बीच स्वास्थ्य सहयोग को नई गति देने के लिए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम चल रहा है:
- आयुष सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए।
- वेटनरी स्कूल और एनिमल हॉस्पिटल: पशु चिकित्सा क्षेत्र में सहयोग।
- एसएसआर नेशनल हॉस्पिटल का विकास: बुनियादी ढांचे को और अधिक सशक्त बनाना।
विकास साझेदारी के ऐतिहासिक प्रतीक
डॉ. जयशंकर ने उन संस्थाओं का भी उल्लेख किया जो दोनों देशों के अटूट भरोसे का प्रतीक हैं:
- महात्मा गांधी संस्थान और विश्व हिंदी सचिवालय
- अटल बिहारी वाजपेयी साइबर टावर
- स्वामी विवेकानंद अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र
- राजीव गांधी विज्ञान केंद्र
विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत-मॉरीशस की यह विकास साझेदारी परियोजनाओं से कहीं ऊपर उठकर लोगों के जीवन स्तर को सुधारने का एक माध्यम है। यह सहयोग दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और आपसी सम्मान का जीवंत उदाहरण है।
