भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक स्थिरता की दिशा में कूटनीतिक सक्रियता बढ़ाते हुए शुक्रवार को जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी से फोन पर वार्ता की। इस बातचीत का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) की स्थिति रही।
होर्मुज स्ट्रेट और ऊर्जा सुरक्षा पर मंथन
दोनों देशों के नेताओं ने पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर गहन चर्चा की। इस बातचीत के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:
- नौवहन सुरक्षा: होर्मुज स्ट्रेट के जरिए होने वाले अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और नेविगेशन की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर सहमति बनी।
- ऊर्जा आपूर्ति: क्षेत्र में तनाव के बावजूद ऊर्जा और संसाधनों की निर्बाध सप्लाई को बनाए रखने की रणनीतियों पर चर्चा हुई।
- संवेदना व्यक्त की: जापानी विदेश मंत्री ने अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान अपनी जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया, जिसके लिए डॉ. जयशंकर ने उनका आभार व्यक्त किया।
मॉरीशस के साथ मजबूत होते संबंध
जापान से बातचीत से पूर्व विदेश मंत्री ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीन रामगुलाम से भी मुलाकात की। डॉ. जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
द्विपक्षीय चर्चा के प्रमुख आयाम:
- साझेदारी में प्रगति: पिछले एक वर्ष में भारत और मॉरीशस के बीच विकास सहयोग, स्वास्थ्य, शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
- समुद्री सुरक्षा: दोनों नेताओं ने हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और आपसी मोबिलिटी को बढ़ाने पर विचार साझा किए।
- सांस्कृतिक जुड़ाव: लोगों के बीच आपसी संबंधों (People-to-People ties) को और अधिक प्रगाढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
विदेश मंत्री का संदेश: डॉ. जयशंकर ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री की भारत के प्रति अटूट मित्रता की सराहना की और कहा कि दोनों देशों के बीच विकास के विभिन्न पहलुओं पर ठोस सहयोग निरंतर जारी रहेगा।

