अक्षय भारत : 06 अप्रैल 2026
नवजात शिशु की देखभाल में मालिश का स्थान सर्वोपरि है। आयुर्वेद में इसे 'अभ्यंग' कहा गया है, जो न केवल बच्चे के शारीरिक ढांचे को मजबूती देता है, बल्कि उसके मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए भी अनिवार्य है। आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और जानी-मानी स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा के अनुसार, सही तरीके से की गई तेल मालिश बच्चे के शुरुआती वर्षों में मील का पत्थर साबित होती है।
मालिश से होने वाले प्रमुख लाभ
- वात संतुलन और शांति: जन्म के समय शिशुओं के शरीर में वात का प्रभाव अधिक होता है, जिससे वे अक्सर बेचैनी या कमजोरी महसूस कर सकते हैं। तेल मालिश इस वात दोष को शांत करती है, जिससे बच्चा रिलैक्स महसूस करता है और उसकी चिड़चिड़ाहट कम होती है।
- मजबूत हड्डियां और बेहतर रक्त संचार: तिल, नारियल या सरसों के तेल से मालिश करने पर त्वचा को गहरा पोषण मिलता है। इससे न केवल मांसपेशियां और हड्डियां फौलादी बनती हैं, बल्कि ब्लड सर्कुलेशन (रक्त प्रवाह) भी सुधरता है, जिससे शरीर के हर अंग तक जरूरी पोषक तत्व पहुँचते हैं।
- गहरी नींद और मानसिक विकास: वैज्ञानिक शोधों से सिद्ध हो चुका है कि जिन बच्चों की नियमित मालिश होती है, उन्हें बेहतर और गहरी नींद आती है। अच्छी नींद सीधे तौर पर मस्तिष्क के विकास से जुड़ी है। इसके अलावा, मालिश के दौरान स्पर्श से बच्चा अपनी मां के साथ भावनात्मक रूप से अधिक सुरक्षित महसूस करता है।
- पाचन तंत्र और इम्यूनिटी: चूंकि छोटे बच्चे शारीरिक गतिविधि नहीं कर पाते, इसलिए मालिश उनके पाचन को सुचारू रखने का सबसे अच्छा जरिया है। यह गैस, कब्ज और पेट दर्द जैसी समस्याओं को दूर रखती है और बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को बढ़ाती है।
मालिश शुरू करने की सही उम्र
शिशु के जन्म के तुरंत बाद मालिश से बचना चाहिए क्योंकि उस समय त्वचा अत्यंत संवेदनशील होती है। जन्म के 2 से 3 हफ्ते बाद या जब बच्चा एक महीने का हो जाए, तब हल्की मालिश शुरू करना सबसे सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है।
शिशु के जन्म के तुरंत बाद मालिश से बचना चाहिए क्योंकि उस समय त्वचा अत्यंत संवेदनशील होती है। जन्म के 2 से 3 हफ्ते बाद या जब बच्चा एक महीने का हो जाए, तब हल्की मालिश शुरू करना सबसे सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है।
सावधानियां और जरूरी बातें
- दबाव का ध्यान: बच्चे का शरीर बहुत नाजुक होता है, इसलिए मालिश हमेशा हल्के हाथों से करें।
- मौसम के अनुसार तेल: सर्दियों में गर्म तासीर वाले तिल या सरसों के तेल का उपयोग करें, जबकि गर्मियों में नारियल तेल सबसे उत्तम है।
- स्नान का नियम: तेल मालिश के कुछ समय बाद बच्चे को हमेशा गुनगुने पानी से ही नहलाएं।
- डॉक्टरी सलाह: यदि बच्चे को त्वचा संबंधी कोई एलर्जी या अन्य समस्या हो, तो मालिश से पहले विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।

